Monday, January 11, 2016

यूपी की शादी

सूचना : "इस कहानी के पात्र और घटनाएँ काल्पनिक है, इसका सम्बन्ध किसी भी दोस्त की शादी से नहीं हैं "

"यूपी की शादी का एक दृश्य"

बाराती ताबड़ तोड़ तरीके से नाचते हुए गंतव्य की ओर पहुँचने को हैं।
अंधड़ तरीके से दूल्हे के दोस्त ऐसे नाच रहे है, जैसे Dance India Dance की गीता माँ, टेरेन और रेमो डिसूजा उन्हें जज कर रहे हैं, और अभी मिथुन दा उठ के "क्या बात, क्या बात" करके दाद दें ही देंगे।

बारात गंतव्य गेट तक पहुंच जाती और दूल्हे की कार अंदर जाने को हैं, और तभी दोस्तों के दिमाग में जैसे एक हूटर बज जाता है कि बस ये आखिरी मौका बचा है दूल्हे को दिखाने का, कि कौन कितना नाचा ! इसी के साथ सभी दूल्हे की गाड़ी के आगे लोट कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में लग जाते हैं। 

मौसम कैसा भी हो, हर दोस्त इतनी शिद्दत से तो नाच ही लेता हैं कि उसकी बनियान, कमीज और कोट तीनो सामान मात्रा में पसीने से महकने लगते हैं, और जो दोस्त Deo/Perfume लगाना भूल गए थे उन्हें खुद का शरीर त्यागने का मन करने लगता हैं।
बारात के स्वागत में सब हाथ में 'गेंदे के माला' लेकर खड़े हैं। जैसे भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ती है, ठीक वैसे ही यहाँ दूल्हे को दोस्तों को काबू करने के लिए लोग ज़बरदस्ती गेंदे की माला पहनाने में लग जाते है, जिससे उन्हें ये लग जाय कि बेटा तुम जिस काम के लिए आये थे, ये उसी का पुरस्कार हैं। और यकीन मानिए माला गले में डलते ही ना जाने कहा की शालीनता आ जाती है।

दोस्तों के द्वारा किया गया ये सामूहिक तांडव का एक सुखद अंत हो जाता है, और बाद में सभी दोस्त चाट, गोलगप्पे और चाउमीन के काउंटर पे अपनी भूख मिटाते हुए पाये जाते हैं।

Tuesday, October 27, 2015

टेक्नोलॉजी


गर्मी की छुट्टियों में खेलते हुए बच्चा(उम्र 5-6वर्ष) अपने दादाजी से-

बच्चा - "दादाजी कोई कहानी सुनाइए"
दादाजी ने मन ही मन रोमांचित होकर ये सोचा कि ये कमाल ही है,
जो आज के ज़माने में भी बच्चों को कहानी सुनने मन करता है|

दादाजी ख़ुशी से -"अच्छा लो, सुनो फिर !!
एक बार एक राजा था... वो बहुत ही दयालु था.."

बच्चा बीच में ही टोकते हुए - "दादाजी !! इससे अच्छी कहानियाँ तो मेरे kindle में हैं"

बच्चा अपना kindle खोल के कोई कहानी पढ़ने लगता हैं, और दादाजी विस्मयी सी 
आँखों में आँसू लिए उस टेक्नोलॉजी के सामने खुद को छोटा सा महसूस करके रह जाते है|

Wednesday, February 25, 2015

NRI returns home without chocolates, family members refuse to identify him


NRI Bring Chocolates
Gorakhpur : A shocking statement by all family members – “Chintu !! You are not our blood” , turned Chintu unconscious immediately when he came back to home after two years from on-site.
Our reporter Laal-Chi said that Chintu Singh Coder was working for a multinational software company, who got an on-site opportunity in Nepal two years back.
According to Laal-Chi, Chintu was first in his family to go abroad. All family members were so happy but after two year when Chintu came back to India, they showed their real face.
“He was not carrying enough chocolates, so he is not our blood,” said a family member.
Chintu was admitted to nearest emergency hospital and is now out of danger according to the doctor. After several hour discussion between family members, they finally wanted to give one last chance to Chintu to prove himself by sending him back to Nepal. Family members want that this time Chintu bring enough chocolates with him.
A secret source revealed that Chintu was planning to never comeback to India.

Professional wedding photographer clicks all photos on his own wedding, photoshops himself later in album


New Delhi : Clickeshwar is very serious human being when it comes to clicking pictures, specially ‘wedding photography’. He completed his degree BAF (Bachelor of Aperture & Focus) in Wedding Technology with a reputed photographic institute.
Wedding Photographer
“I know photoshop, will paste myself later in the album.”
Institute is approved with Auto Focus, ISO 100 –  25600, f 1/8 and 30 fps ranking. Clickeshwar was very bright student from the beginning of the course and finally managed to get placed as a wedding photographer. He became a very famous wedding photographer because of his Facebook page ‘Click Clickeshwar Click Photography’.  According to him only, no one can click better picture than him in weddings, but problem came when his own marriage got fixed.
To click ultimate photos on his own wedding, he decided to click by himself. One week before his marriage, when bride was busy in Turmeric and Mehndi rituals, Clickeshwar was studying hard to crack Photoshop certification. Somehow, he managed to clear CS6 certification just 20 minutes before beginning of his baarat dance.
As said, he is now a certified Photoshop photographer. He clicked all of his wedding pictures starting from Dwaar Pooja, Jaimaal, Raat ke Phere, taking blessing from Pandit jee and even of  vidai of his wife. His master knowledge in Photoshop made pictures more than real.
Clickeshwar is now planning to click his honeymoon pictures on his own and photoshop himself later.

Friday, December 5, 2014

पुरानी यादें



राज को जॉब करते हुए 7 साल हो चुके हैं , शादी भी हो गयी है। आज इतने सालो के बाद उसका अचानक मन कर गया कॉलेज जाने का, और वो भी अपनी बीवी के साथ ।

शायद कुछ पुरानी बात बताना चाहता हो अपनी बीवी से । फिर क्या, रविवार के दिन निकाली अपनी कार , और चल पड़ा कॉलेज को।

और कॉलेज पहुंच कर उसको ना जाने क्या हुआ, वो ख़ुशी के मारे भावुक होकर , जैसे अपने हर एक-एक राज़ अपनी बीवी को बताने लगा।

कॉलेज टाइम की वो आवारा मस्ती, क्लास बंक, कैंटीन की गपशप और दोस्तों की यारियां, की बातें करते हुए 2 घंटे पहले ही बीत चुके थे। उसकी बीवी भी उसके अतीत को बड़े मज़े लेकर सुन रही थी।

रविवार को कॉलेज की खाली गलियों में उन दोनों के ही ठहाके सुनाई दे रहे थे।

फिर अचानक राज रुका, और उसने प्रिया के बारे में अपनी बीवी को बताया।
कैसे वो पागलो की तरह उसके पीछे घूमता था, और प्रिया उसको भाव ही नहीं देती थी।

एक बार तो हद्द ही कर दी राज ने, प्रिया उस दिन क्लास नहीं आई थी , और राज ने उसकी attendence  पे "यस सर" बोल दिया। फिर क्या , उस दिन से जैसे विजय ध्वज लहरा दिया हो राज ने।

सभी दोस्तों की नज़र में वो दोनों "Couple " ही थे, वो दोनों माने या ना माने।

राज ये सब बता तो रहा था, पर अपनी बीवी के चेहरे के हाव भाव भी देख रहा था।

जब राज ने अपने सारे राज़ के खुलासे कर दिए, और जब वो एक खुली किताब बन चुका था, तब उसने हल्की सी मुस्कान के साथ अपनी बीवी से कहा - " चलो प्रिया ! अब घर चलते हैं "

और फिर, दोनों हाथ में हाथ डाले , कार की ओर चल पड़े।

Wednesday, October 22, 2014

दूर वाली दिवाली

इस बार की ये पहली दिवाली है, जिसमे साथ में, ना ही कोई परिवार का सदस्य, ना ही कोई निकट सम्बन्धी घनिष्ठ हैं। और उपर से देश भी नया । कहने की बात सिर्फ ये है कि इस दिवाली अकेला हूँ मैं ।

वैसे काफी तादात में यहाँ लोग दिवाली मानते है, पर जैसे मैं मनाता आ रहा हूँ , वो याद आता है आज।

धनतेरस के दिन घर की साफ़ सफाई के बाद बारी आती थी शाम को खरीददारी करने की। इस दिन कुछ नया आभूषण या बर्तन खरीदना होता था। यहाँ मुझे ऐसा बर्तन खरीदने का प्रचलन नहीं दिखाई दिया, शायद सबकी पसंद आभूषण ही है|

फिर बारी आती थी, गणेश-लक्ष्मी जी और हनुमान जी की मूर्ति खरीदने की। खील, लाई, बताशे, खिलोने, गट्टे, दीये, मोमबत्तियां और पूजा का सामान लेने में जो मज़ा ही अलग है। कुछ न कुछ तो मोल भाव करना ही होता था।

यहाँ तो शायद ऐसे खरीदारी का प्रचलन ही नहीं है।

हाँ, यहाँ के लोग भी उतनी ही हर्ष से पटाखे फोड़ते है,जैसे की अपने यहाँ। कल रात 12 बजते ही, आतिशबाजी का कारवां शुरू हो गया |

वैसे सिर्फ ये पंक्तियाँ ही काफी है, मेरी मनोदशा बयान करने को-

" इस बार मैंने दिए भी लिए है,
इस बार मिठाई भीे ली है
कोशिश है कि, सोहार्द्य से मनाउ,
पर इस बार दिवाली अकेली ही हैं "

दूर ही सही, दिवाली की शुभकामनाएं तो कही से भी दी जा सकती हैं।

शुभ दिवाली - सुरक्षित दिवाली

Friday, December 13, 2013

तेरा रक़ीब

तुझसे नफ़रत करने वाला वो चाँद ही हैं,
जो हर पखवाड़े बाद ही , तुझको देखने आता हैं ॥